राजीव भाई का परिचय

मित्रो राजीव दीक्षित जी के परिचय मे जितनी बातें कही जाए वो कम है ! कुछ चंद शब्दो मे उनके परिचय को बयान कर पाना असंभव है ! ये बात वो लोग बहुत अच्छे से समझ सकते है जिन्होने राजीव दीक्षित जी को गहराई से सुना और समझा है !! फिर भी हमने कुछ प्रयास कर उनके परिचय को कुछ शब्दो का रूप देने का प्रयत्न किया है ! परिचय शुरू करने से पहले हम आपको ये बात स्पष्ट करना चाहते हैं कि जितना परिचय राजीव भाई का हम आपको बताने का प्रयत्न करेंगे वो उनके जीवन मे किये गये कार्यों का मात्र 1% से भी कम ही होगा ! उनको पूर्ण रूप से जानना है तो आपको उनके व्याख्यानों को सुनना पडेगा !!.

राजीव दीक्षित जी का जन्म 30 नवम्बर 1967 को उत्तर प्रदेश राज्य के अलीगढ़ जनपद की अतरौली तहसील के नाह गाँव में पिता राधेश्याम दीक्षित एवं माता मिथिलेश कुमारी के यहाँ हुआ था। उन्होने प्रारम्भिक और माध्यमिक शिक्षा फिरोजाबाद जिले के एक स्कूल से प्राप्त की !! इसके उपरान्त उन्होने इलाहाबाद शहर के जे.के इंस्टीट्यूट से बी० टेक० और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (Indian Institute of Technology) से एम० टेक० की उपाधि प्राप्त की। उसके बाद राजीव भाई ने कुछ समय भारत CSIR(Council of Scientific and Industrial Research) मे कार्य किया। तत्पश्चात् वे किसी Research Project मे भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ० ए पी जे अब्दुल कलाम के साथ भी कार्य किया !!

श्री राजीव जी इलहाबाद के जे.के इंस्टीट्यूट से बी.टेक .की शिक्षा लेते समय ही "आजादी बचाओ आंदोलन" से जुड गए जिसके संस्थापक श्री बनवारी लाल शर्मा जी थे जो कि इलहाबाद विश्वविद्यालय में ही गणित विभाग के मुख्य शिक्षक थे ! इसी संस्था में राजीव भाई प्रवक्ता के पद पर थे, संस्था में श्री अभय प्रताप, संत समीर, केशर जी, राम धीरज जी, मनोज त्यागी जी तथा योगेश कुमार मिश्र जी शोधकर्ता अपने अपने विषयों पर शोध कार्य किया करते थे जो कि संस्था द्वारा प्रकाशित "नई आजादी उद्घोष" नमक मासिक पत्रिका में प्रकाशित हुआ करते थे और राजीव भाई के ओजस्वी वाणी से देश के कोने-कोने में व्याख्यानों की एक विशाल श्रंखला-बद्ध वैचारिक क्रान्ति आने लगी राजीव जी ने अपने प्रवक्ता पद के दायित्वों को एक सच्चे राष्ट्रभक्त के रूप में निभाया जो कि अतुल्य है ……

बचपन से ही राजीव भाई देश की समस्याओ को जानने की गहरी रुची थी ! प्रति मास 800 रूपये का खर्च उनका मैगजीनों, सभी प्रकार के अखबारो को पढने मे हुआ करता था ! वे अभी नौवी कक्षा मे ही थे कि उन्होने अपने इतिहास के अध्यापक से एक ऐसा सवाल पूछा जिसका जवाब उस अध्यापक के पास भी नहीं था जैसा कि आप जानते है कि हमको इतिहास की किताबों मे पढाया जाता है कि अंग्रेजो का भारत के राजा से प्रथम युद्ध 1757 मे पलासी के मैदान मे रोबर्ट क्लाइव और बंगाल के नवाब सिराजुद्दोला से हुआ था ! उस युद्ध मे रोबर्ट क्लाइव ने सिराजुद्दोला को हराया था और उसके बाद भारत गुलाम हो गया था !!

राजीव भाई ने अपने इतिहास के अध्यापक से पूछा कि सर मुझे ये बताइए कि प्लासी के युद्ध में अंग्रेजो की तरफ से कितने सिपाही थें लडने वाले ? तो अध्यापक कहते थे कि मुझको नहीं मालूम. तो राजीव भाई ने पूछा क्यों नहीं मालूम? तो कहते थे कि मुझे किसी ने नहीं पढाया तो मै तुमको कहाँ से पढा दू.

तो राजीव भाई ने उनको बराबर एक ही सवाल पूछा कि सर आप जरा ये बताईये कि बिना सिपाही के कोई युद्ध हो सकता है ?? तो अध्यापक ने कहा नहीं ! तो फिर राजीव भाई ने पूछा फिर हमको ये क्यों नहीं पढाया जाता है कि युद्ध में कितने सिपाही थे अंग्रेजो के पास. ? और उसके दूसरी तरफ एक और सवाल राजीव भाई ने पूछा था कि अच्छा ये बताईये कि अंग्रेजो के पास कितने सिपाही थे ये तो हमको नहीं मालुम सिराजुद्दोला जो लड रहा था हिंदुस्तान की तरफ से उनके पास कितने सिपाही थे? तो अध्यापक ने कहा कि वो भी नहीं मालूम. !! तो खैर इस सवाल का जवाब बहुत बडा और गंभीर है कि आखिर इतना बडा भारत मुठी भर अंग्रेजो का गुलाम कैसे हो गया ?? यहाँ लिखेंगे तो बात बहुत बडी हो जाएगी ! इसका जवाब आपको राजीव भाई के एक व्याख्यान जिसका नाम आजादी का असली इतिहास मे मिल जाएगा !!

तो देश की आजादी से जुडे ऐसे सैंकडों-सैंकडों सवाल दिन रात राजीव भाई के दिमाग मे घूमते रहते थे !! इसी बीच उनकी मुलाकात प्रो० धर्मपाल नाम के एक इतिहासकार से हुई जिनकी किताबें अमेरिका मे पढाई जाती है लेकिन भारत मे नहीं !! धर्मपाल जी को राजीव भाई अपना गुरु भी मानते है, उन्होने राजीव भाई के काफी सवालों का जवाब ढूंढने मे बहुत मदद की! उन्होने राजीव भाई को भारत के बारे मे वो दस्तावेज उपलब्ध करवाए जो इंग्लैंड की लाइब्रेरी हाउस आफ कामन्स मे रखे हुए थे जिनमे अंग्रेजो ने पूरा वर्णन किया था कि कैसे उन्होने भारत गुलाम बनाया ! राजीव भाई ने उन सब दस्तावेजो का बहुत अध्यन किया और ये जानकर उनके रोंगटे खडे हो गए कि भारत के लोगो को भारत के बारे मे कितना गलत इतिहास पढाया जा रहा है !! फिर सच्चाई को लोगो के सामने लाने के लिए राजीव भाई गाँव, गाँव शहर शहर जाकर व्याख्यान देने लगे ! और साथ-साथ देश की आजादी और देश के अन्य गंभीर समस्याओ का इतिहास और उसका समाधान तलाशने मे लगे रहते !!

इलाहबाद मे पढते हुए उनके एक खास मित्र हुआ करते थे जिनका नाम है योगेश मिश्रा जी उनके पिता जी इलाहबाद हाईकोर्ट मे वकील थे !! तो राजीव भाई और उनके मित्र अक्सर उनसे देश की आजादी से जुडी रहस्यमयी बातों पर वार्तालाप किया करते थे ! तब राजीव भाई को देश की आजादी के विषय मे बहुत ही गंभीर जानकारी प्राप्त हुई ! कि 15 अगस्त 1947 को देश मे कोई आजादी नहीं आई ! बल्कि 14 अगस्त 1947 की रात को अंग्रेज माउंट बेटन और नेहरू के बीच के समझोता हुआ था जिसे सत्ता का हस्तांतरण (transfer of power agreement) कहते हैं ! इस समझोते के अनुसार अंग्रेज अपनी कुर्सी नेहरू को देकर जाएंगे लेकिन उनके द्वारा भारत को बर्बाद करने के लिए बनाए गये 34735 कानून वैसे ही इस देश मे चलेंगे !! और क्योकि आजादी की लडाई मे पूरे देश का विरोध अँग्रेजी ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ था तो सिर्फ एक ईस्ट इंडिया कंपनी भारत छोड कर जाएगी और उसके साथ जो 126 कंपनिया और भारत को लूटने आए थी वो वैसे की वैसे ही भारत मे व्यापार करेगी ! लूटती रहेगी ! आज उन विदेशी कंपनियो की संख्या बढ कर 6000 को पार कर गई है !! (इस बारे मे और अधिक जानकरी उनके व्याख्यानों मे मिलेगी)

एक बात जो राजीव भाई को हमेशा परेशान करती रहती थी कि आजादी के बाद भी अगर भारत मे अँग्रेजी कानून वैसे के वैसे ही चलेंगे और आजादी के बाद भी विदेशी कंपनियाँ भारत को वैसे ही लूटेंगी जैसे आजादी से पहले ईस्ट इंडिया कंपनी लूटा करती थी ! आजादी के बाद भी भारत मे वैसे ही गौ ह्त्या होगी जैसे अंग्रेजो के समय होती थी तो हमारे देश की आजादी का अर्थ क्या है ??

तो ये सब जानने के बाद राजीव भाई ने इन विदेशी कंपनियो और भारत में चल रहे अँग्रेजी कानूनों के खिलाफ एक बार फिर से वैसा ही स्वदेशी आंदोलन शुरू करने का संकल्प लिया जैसा किसी समय मे बाल गंगाधर तिलक ने अंग्रेजो के खिलाफ लिया था !! अपने राष्ट्र मे पूर्ण स्वतंत्रता लाने और आर्थिक महाशक्ति के रुप में खडा करने के लिए उन्होंने आजीवन ब्रह्मचारी रहने की प्रतिज्ञा की और उसे जीवन पर्यन्त निभाया। वो गाँव-गाँव, शहर शहर घूम कर लोगो को लोगो को भारत मे चल रहे अँग्रेजी कानून, आधी अधूरी आजादी का सच, विदेशी कंपनियो की भारत मे लूट आदि विषयो के बारे मे बताने लगे ! सन् 1999 में राजीव के स्वदेशी व्याख्यानों की कैसेटों ने समूचे देश में धूम मचा दी थी।!

1984 मे जब भारत मे भोपाल गैस कांड हुआ तब राजीव भाई ने इसके पीछे के षड्यंत्र का पता लगाया और ये खुलासा किया कि ये कोई घटना नहीं थी बल्कि अमेरिका द्वारा किया गया एक परीक्षण था (जिसकी अधिक जानकारी आपको उनके व्याख्यानों मे मिलेगी !!) तब राजीव भाई यूनियन कार्बाइड कंपनी के खिलाफ प्रदर्शन किया !

इसी प्रकार 1995-96 में टिहरी बाँध के बनने के खिलाफ ऐतिहासिक मोर्चे में भाग लिया और पुलिस लाठी चार्ज में काफी चोटें भी खायीं !! और इसी प्रकार 1999 मे उन्होने राजस्थान के कुछ गांवसियों साथ मिलकर एक शराब बनाने वाली कंपनी जिसको सरकार ने लाइसेन्स दिया था और वो कंपनी रोज जमीन की नीचे बहुत अधिक मात्रा मे पानी निकाल कर शराब बनाने वाली थी उस कंपनी को भगाया !!

1991 भारत मे चले ग्लोबलाएशन, लिब्रलाइजेसशन को राजीव भाई स्वदेशी उद्योगो का सर्वनाश करने वाला बताया और पूरे आंकडों के साथ घंटो-घंटो इस पर व्याख्यान दिये और स्वदेशी व्यापारियो को इसके खिलाफ जागरूक किया !! फिर 1994 मे भारत सरकार द्वारा किए WTO समझोते का विरोध किया क्योकि ये समझोता भारत को एक बहुत बडी आर्थिक गुलामी की और धकेलने वाला था ! इस समझोते मे सैंकडों ऐसे शर्ते सरकार ने स्वीकार कर ली थी जो आज भारत मे किसानो की आत्मह्त्या करने का, रुपए का डालर की तुलना मे नीचे जाने का, देश बढ रही भूख और बेरोजगारी का, खत्म होते स्वदेशी उद्योगो का, बैंकिंग, इन्सुरेंस, वकालत सभी सर्विस सेक्टर मे बढ रही विदेशी कंपनियो का कारण है ! राजीव भाई के अनुसार इस समझोते के बाद सरकार देश को नहीं चलाएगी बल्कि इस समझोते के अनुसार देश चलेगा !! देश की सारी आर्थिक नीतियाँ इस समझौते को ध्यान मे रख कर बनाई जाए नोंगी ! और भारत मे आज तक बनी किसी भी सरकार मंे हिम्मत नहीं जो इस WTO समझौते को रद्द करवा सके !!

अशित पाठक जी का परिचय

स्वदेशी के प्रणेता एवं महान देशभक्त स्वर्गीय भाई राजीव दीक्षित जी के संकलपों और शहीदों के सपनों का भारत बनाने के लिए राष्ट्र स्वाभिमान ट्रस्ट की स्थापना राजीव भाई के विचारों के प्रबल समर्थक एवं उनके संकलपों को जीने और जमीन पर उतारने वाले भाई अशित पाठक जी के नेतृत्व में हुई। वे स्वर्गीय राजीव भाई की तरह स्वामी राम देव जी साथ भारत स्वाभिमान ट्रस्ट एवं पंतजलि योग समिति से जुडे़। पंतजलि से उनको राजीव भाई नेही जोड़ा था परन्तु जुडने के मात्र 6 माह बाद राजीव भाई की अचानक भारत माँ की सेवा करते शहादत हो गई और वो शहीद हो गये। इसके पश्चात राजीव भाई के सापनों को साकर करने के लिए अशित पाठक जी ने पूर्ण संकल्प लिया और 2011 में अपनी मल्टीनेशनल की लाखों की जाॅब छोड़ भारत स्वाभिमान ट्रस्ट एवं पतजलि के माध्यम से राष्ट्र सेवा में अपने को आहुत करने लगे। जल्द ही उनकी सेवाओं, प्रखरता और बुद्धिमत्ता ने उन्हें बरेजी का मण्डल प्रभारी फिर प.उत्तर प्रदेश का राज्य प्रभारी बना दिया गया। उन्होंने स्वर्गीय राजीव भाई के संकल्प को विस्तृत रूप देने की लिए एक संगठन राष्ट्र स्वाभिमान ट्रस्ट की नीव रखी जिसमें उन्होंने अपना संरक्षक क्रान्तिकारी परिवार के वंशजों और मुख्य मार्गदर्शक के रूप में स्वर्गीय राजीव भाई के पिता जी से और पूज्य संत विजय कौशल जी महाराज से आशीर्वाद लिया।

भाई अशित पाठक जी का जन्म 10 जुलाई 1975 को शहीदों की नगरी शाहजहाँपुर मे हुआ।जहाॅ अमर शहीद राम प्रसाद बिस्मिल,अशफाक उल्ला खाॅ का जन्म हुआ।क्रान्तिकारी विचारों के धनी, बहुत ही सरल व्यवहार के , कार्यकर्ताओं में बेहद लोकप्रिय और समाज मे स्नेह और सम्मान पाने वाले भाई अशित पाठक जी विज्ञान स्नातक हैं और उनकी पूरी शिक्षा-दीक्षा शाहजहाॅपुर मे हुई।उनके पिता एक सफलतम प्रतिष्ठित वकील है। इनकी माता एक पढी लिखी संस्कारी और धार्मिक महिला हैं। इनके दो भाई प्राइवेट सेक्टर मे उच्च पदों पर कार्यरत हैं। धर से सक्षम अशित जी की पत्नी संयुक्त परिवार में रहते हुए भी उनके सामाजिक,राष्ट्र और धर्म के कार्यों मे बढ-चढ कर उत्साहवर्धन करती हैं। आपके 1 पुत्र और 1 पुत्री है। भाई अशित पाठक जी को बचपन से ही शहीदों की और महापुरूषों की गथाओं को पढने और जानने का शौक था, जितना वो बडे होते गए महापुरूषों और शहीदों के प्रति उनके मन मे उतना ही सम्मान और कृतज्ञता बढ़ने लगी। साथ ही साथ देश और धर्म के लिए कुछ कर गुजरने की इच्छा भी बलवती होने लगी। इस क्रम में अपनी जन्मस्थली जो भगवान परशुराम जी की और अमर शहीद प0 राम प्रसाद बिस्मिल,अशफक उल्ला खाँ, ठाकुर रोशन सिंह जी की भी जन्म स्थली हैं, उसमें सर्वप्रथम उन्होंने 2008 में शाहजहाॅपुर (उ0 प्र0) की जलालाबाद तहसील को भगवान परशुराम जी की जन्मस्थली धोषित करवाने का संकल्प लिया और भगवान "परशुराम मंंिदर जीर्णोद्वार एवं जनजागरण समिति" बनाई। जनता को साथ ले एक वृहल आंदोलन और संधर्ष छेडा जा आज भी पूरी ऊर्जा से जारी है।

अत्यधिक संवेदनशील एवं कर्तव्यनिष्स व्यक्तित्व का अनुपम उदाहरण हैं भाई अशित पाठक जी उनकी संवेदना का एक उदाहरण मिलता है जहाॅ उन्हांेने एक गरीब किसान की जो उनकी खेती करता था और ट्रैक्टर चलाता था कैंसर होजाने पर उसके ईलाज में लाखों रूपये खर्च कर दिये और लखनऊ के प्रतिष्ठित अस्पतालों में लगातार एक वर्ष इलाज कराया और इस दौरान काम न करने पर भी परिवार को उसकी मासिक तनख्वाह उसके परिवार के जीवन यापन के लिए भेजते रहे । और मानवीय संवेदनाओं को हमेशा ऊपर रखते हुए गरीब, पिछडे़ लोगों की मदद करना , गरीब कन्याओं की शादी विवाह में मदद करना एवं राह में दुघर्टना में घायल व्यक्ति को हमेशा अस्पताल तक पहुंचाना तथा उसके इलाज की समुचित व्यवस्था करना ये अक्सर उनकी मानवीय कार्यों में सम्मिलित है।

अशित जी की शाख्शियत को देखकर एक ही लाइन याद आती है कि "जिसे तूफां से उलझने का शौक हो , ऐसी कश्ती को समन्दर भी दुआ देता है।"

2009 में उन्होंने युवाओं को देश धर्म और शहीदों के प्रति जाग्रत करने के लिए "जागो भारत जागो , एक मुहीम हिन्दुस्तान को बदलने की",विचारधारा की शुरूआत की और युवाओं और लोगों को जागृत करने लिए इस विचारधारा के तहत शहीदों की गाथाओं को घर - घर , गली - गली, मोहल्ले - मोहल्ले तक कई कार्यक्रमों के माध्यम से पहुँचाया। शहीदों के प्रति इनकी आस्था और सम्मान इसी से पता चलता है कि इन्होेंने शाहजहाँपुर टाउन हाल स्थित शहीदों की प्रतिमाओं की दुर्दशा खत्म करवाने और उनका जीर्णाेद्वार करवाने की मांग को मनवाने के लिए डेढ़ वर्षों तक लगातार प्रतिमाओं की सफाई, माल्यार्पण किया। अशित जी के नेतृत्व में चलाये गए शहीदों के सम्मान के संघर्ष, आंदोलन और अनशन के फलस्वरूप प्रशासन ने शहीदों की प्रतिमाओं का भव्य सौदर्यीकरण कराया।

"राष्ट्र स्वाभिमान ट्रस्ट" के प्रमुख उद्देश्य

  1. 1. " राष्ट्र स्वाभिमान ट्रस्ट " देश और समाज के लिए बहुमुखी योजनाबद्ध कार्य करेगा जिसमे गौमाता,गंगा माता, गायत्री माता,गौरीमाता को विशेष महात्व दिया जायेगा।
  2. 2. योग,आयुर्वेद,बालसंस्कार शिविर, शहीदों महापुरूषों के आदर्शोें एवम् स्वर्गीय भाई राजीव दीक्षित जी की परिकल्पना स्वदेशी से स्वाबलंबी एवम् स्वाबलंबी से स्वाभिमानी भारत बनाने के लिए भारत के ग्रामों से शुरू कर घर-घर तक इस विचारधारा को कार्यरूप मंे पहुँचाया जायेगा।
  3. 3. " राष्ट्र स्वाभिमान ट्रस्ट " मुख्य रूप से उस व्यवस्था को राष्ट्र में स्थापित रकने का प्रयास करेगा। जिसमें भारत के ग्राम और ग्रामवासियों को स्वदेशी से स्वाबलंबी और स्वाभिमानी बनाने की एक विस्तृत परिकल्पना होगी।
  4. 4. " राष्ट्र स्वाभिमान ट्रस्ट " भारत के ग्रामीण किसान ,गरीब मजदुर के बच्चों को अच्छी और संस्कारित शिक्षा और आधुनिक चिकित्सा ग्राम में ही उपलब्ध करायी जायेगी जिससे कि वह शहर में रहने वाले बच्चों से भी अच्छी प्रतियोगिता कर सके और देश के विकास में अग्रणी बन सके।
  5. 5. " राष्ट्र स्वाभिमान ट्रस्ट " समाज में फैली कुरीतियों के विरूद्ध वृहद अभियान चलाकर समाज को जागृत करेगा।
  6. 6. राष्ट्र स्वाभिमान ट्रस्ट,स्वर्गीय राजीव दीक्षित जी की परिकल्पना पर गौ आधारित प्राकृतिक एवम् विषमुक्त खेती को एक वृहद जागरूकता आंदोलन चलाकर किसानों को वर्तमान लुटेरी और कृषिनीति से पूर्ण विषमुकत कराया जायेगा।
  7. 7. " राष्ट्र स्वाभिमान ट्रस्ट "भारत के ग्रमीण युवा को ग्राम रोजगार के प्रमाणित अवसर उपलब्ध करोर शहर का पैसा ग्राम में लाना जिससे बिना सरकारी मदद के ग्राम का युवा स्वसबलंवी और स्वाभिमानी बने एवम् गाॅव को शहरो जैसा आधुनिक परन्तु मर्यादित विकास मिल सके।
  8. 8. " राष्ट्र स्वाभिमान ट्रस्ट "स्वर्गीय राजीव दीक्षित जी के स्वदेश्ी एवम् स्वालंबी,स्वाभिमानी भारत के लिए विदेशी षंड्यंत्र, विदेशी लूट, भ्रष्टाचार और भ्रष्ट व्यवस्था के विरूद्ध एक प्रमाणित आन्दोलन चलाकर जनता का जागृत किया जायेगा।
  9. 9. " राष्ट्र स्वाभिमान ट्रस्ट " चयनित ग्राम में संसद का निर्माण करेगा जो ग्राम की सभी अधिकारों और समस्याओं को पूर्ण सुरक्षित और अपने तंत्र से पालन करवाएगा।यानि पूर्ण ग्राम स्वराज्य स्थापित किया जायेगा।
  10. 10. " राष्ट्र स्वाभिमान ट्रस्ट " नशामुक्ति और चरित्रनिर्माण हेतु एक विस्तृत और प्रभावशाली जनजागरण अभियान और संस्कार शिविरों का आयोजन करेगा। जिसमें योग संस्कृति एवम् आदर्श महीपुरूषों,भगवान राम ,कृष्ण एवम्ं शहीदों की गाथाओं को प्रेरक रूप में बच्चों एवम् युवाओं में ऊचे संस्कार एवम् चरित्र को जीने की प्रेरण दी जायेगी।
  11. 11. " राष्ट्र स्वाभिमान ट्रस्ट " मीडिया और फिल्मों के माध्यम से भारत के जनमानस को एक षंड्यंत्र के तहत मानसिक रूप् से विकृत और चरित्र का पतन कर भोगीवादी प्रवत्तिव को बढ़ाया जा रहा है,इसके विरूद्ध राष्ट्र स्वाभिमान ट्रस्ट भारतीय सुसंस्कारित विचारधारा पर एक सशक्त मीडिया को भारत के जन-जन तक पहुँचायेगा।

संगठन कार्य पद्धति

''राष्ट्र स्वाभिमान ट्रस्ट'' ने मंगलमय ग्राम से मंगलमय राष्ट्र योजना के अंतर्गत शाहजहाँपुर सदर तहसील के पुरैना ग्राम को गोद लिया। प्रथम चरण में पूरे भारत में 25 जिलों में एक-एक ग्राम सभा को चुनकर स्वदेशी पर आधारित आधुनिक परन्तु सुसंस्कारवान, स्वाबलंबी से स्वाभिमानी ग्रामों का निर्माण किया जायेगा। 5 वर्ष में भारत के 300 जिलों में एक-एक ग्राम सभा को इस अभियान के तहत विकसित किया जायेगा। स्वर्गीय भाई राजीव दीक्षित जी की परिकल्पना ''स्वदेशी से स्वाबलंबी, स्वाबलंबी से स्वाभिमानी भारत के अंतर्गत शाहजहाँपुर के सदर तहसील के पुरैना ग्राम को चयनित किया गया। पिछले 25 मई को राष्ट्र स्वाभिमान न्यास के राष्ट्रीय संयोजक अशित पाठ ने विधिवत पुरैना ग्राम में इसकी नींव रखी। 27 जून को भारत के आज़ादी के अमर शहीदों के वंशजों ने इस ग्राम का भ्रमण कर ग्राम में क्रांतिकारी जोश भरा था। तब से अब तक वृक्षारोपण, गौ आधारित प्राकृतिक खेती, योग एवम् प्राकृतिक चिकित्सा जैसे कई कार्यक्रम हो चुके हैं। अब ग्राम में मंगलमय ग्राम रोजगार योजना के तहत प्रथम चरण में गाँव के अतिगरीब और अतिपिछड़े 30 परिवार से एक व्यक्ति को स्वदेशी रोजगार से स्वाबलंबी बनाया जायेगा। ग्राम विकसित हो अर्थ से जुड़े, इस व्यवस्था के अंतर्गत छोटे छोटे कई कुटीर उद्योग लगाकर शहर का पैसा ग्राम में लाकर पूरे ग्राम को एक 'रूरल काॅपोरेट हब' बनाया जायेगा। जिसके सालाना प्राॅफिट से ग्राम में सुसंस्कारवान शिक्षा वाले स्कूल, काॅलेज, व तकनीकी संसाधनों से परिपूर्ण चिकित्सालय बनाया जायेगा। किसान को गौ आधारित प्राकृतिक खेती से उत्पन्न अनाज और फसलों को सरकारी भाव से 100 रूपए से 500 रूपए कुंटल तक अतिरिक्त भाव देकर खरीदा जायेगा। फिर उन्हीं फसलों और अनाजों से ग्राम में ही विभिन्न उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद ग्राम वालों को रोजगार से स्वाबलंबन देते हुये उनसे ही बनवाया जायेगा। एक व्यवस्थित मार्केटिंग व्यवस्था के अन्तर्गत स्वीर्गीय भाई राजीव दीक्षित जी की पूर्ण स्वदेशी और पूर्ण स्वराज्य की परिकल्पना के अंतर्गत घर-घर पहंुचाने का एक वृहद और प्रभावशाली कार्ययोजना के तहत कार्य किया जायेगा। गौपालन पर विशेष जोर दिया जायेगा और गौपालन के माध्यम से ग्राम की अर्थव्यवस्था को मजबूत बना ग्राम को एक हाईटेक परन्तु सुसंस्कृत ग्राम बनाया जायेगा। शहीदों की नगरी शाहजहांपुर से शहीदों के सपनों का भारत बनाने का सपना पूरा करने की शुरूआत करते हुए आने वाले सालों में देश के 300 जिलों के 300 ग्राम सभाओं फिर भारत के प्रत्येक ग्राम में किया जायेगा। ग्राम में 'ग्राम संसद' होगी जो ग्रामवासियों के साथ बैठकर ग्राम स्वराज और विकास की योजनायें बनाएगी और उसको पूरी पारदर्शिता से पालन करायेगी। ग्राम में योग, बालसंस्कार एवम् आध्यात्मिक चेतना के माध्यम से नशा चरित्रहीनता, भ्रष्टाचार, व्यभिचार आदि सामाजिक कुरीतियों का विनाश किया जायेगा।

ग्राम संसद में ग्रामहित के सभी निर्णय ग्रामवासियों की सामूहित बैठक बुलाकर लिए जायेंगे। ग्राम में ऐसी व्यवस्था लागू की जायेगी जहाँ उच्च गुणवत्तायुक्त प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा, अच्छी उच्च तकनीकी वाली चिकित्सा व्यवस्था, 24 घंटे बिजली, पानी, सड़के, कुटीर उद्योग, गौ आधारित रोजगार एवम् स्वाबलंबन, दुग्ध उतपादन एवम् प्रशीतन केन्द्र आदि उपलब्ध हो और सर्वांगीण ग्राम विकास हो। मंगलमय योजना के अन्तर्गत दो गाँव मथुरा में, एक अलीगढ़ में और एक हापुड़ में चयनित कर लिया गया है।

संगठन निर्माण प्रकिृया

  1. 1. राष्ट्रीय स्तर और राज्य स्तर के संगठन की चयन प्रक्रिया राष्ट्रीय स्तर की समिति आपस में बैठकर करेगी और इस स्तर पर वो ही कार्यकर्ता आगे आयेंगे जिन्होंने प्रमाणिक रूप में पूर्ण निष्ठा से राष्ट्र और संगठन सेवा की होगी।
  2. 2. जिला समिति का निर्माण राज्य स्तर के पदाधिकारी करेंगे।
  3. 3. जिला समिति के जितने भी पदाधिकारी और सदस्य हों वो सभी चरित्रवान, सामाजिक प्रतिष्ठा वाले, निष्ठावान, राष्ट्र और संगठन के प्रति पूर्ण समर्पित और पूर्व में भी उनका समाज या राष्ट्रसेवा में योगदान रहा हो। नेतृत्व की क्षमता वाला एवम् कुशलवक्ता भी हो।
  4. 4. जिला स्तर के पदाधिकारी प्रतिदन कम से कम 3 से 4 घंटे और माह में 10 से 15 दिन संगठन कार्य में अवश्य देने का संकल्प लें।
  5. 5. चयनित मंगलमय ग्राम सहित जिले में प्रत्येक तहसील, ब्लाॅक एवम् समस्त ग्राम सभाओं में समिति का गठन जिला समिति अपनी देख रेख में सुनिश्चित करायेगी।
  6. 6. जिला स्तर पर जिला प्रभारी, सह जिला प्रभारी, जिला महामन्त्री, संगठन मंत्री, सह संगठन मंत्री, कोषाध्यक्ष, बाल संस्कार शिविर प्रभारी, जिला मीडिया प्रभारी, एवम् मुख्य प्रवक्ता सहित 11 सदस्यीय संरक्षक मंडल नियुक्त करें।
  7. 7. इसी तरह तहसील, ब्लाॅक, ग्राम और वार्ड मोहल्ला समितियां स्थापित होंगी। स्वदेशी को कार्य को वृहद रूप से चलाने के लिए जिले में ''मै स्वदेशी हूँ'' जनजागरण अभियान के लिए एक समिति गठित होगी जो जगह-जगह स्वदेशी जागरण शिविर लगाएगी। इसका प्रमुख 'जिला स्वदेशी रक्षक' कहलायेगा ओर उसकी समिति भी मुख्य समितयों की तरह बनेगी।
  8. 8. संगठन में सदस्यता अभियान को सतत चलाये रखने के लिए संगठन में प्रत्येक कार्यकर्ता निम्नतम 1 रूपए प्रतिदिन के हिसाब से 30 रूपए सदस्यता शुल्क प्रतिमाह देगा।
  9. 9. संगठन के जो राष्ट्रीय स्तर के पदाधिकारी हैं वो 30 रूपए प्रतिमाह के अतिरिक्त 11000/- वार्षिक, राज्यस्तर के पदाधिकारी 5100/- वार्षिक एवं जिलास्तर के पदाधिकारी 1100/- प्रतिवर्ष सदस्यता शुल्क दानस्वरूप संगठन को स्वावलंबी बनाने के लिए प्रदान करेंगे।
  10. 10. राष्ट्रवादी, सच्चे और अच्छे दानदाताओं को भी अपने संगठन के राष्ट्रहित के लक्ष्यों को पूर्ण करने के लिए दान देने का विनयपूर्वक आग्रह कर दान देने के लिए प्रेरित करेंगे।
  11. 11. संगठन और राष्ट्रहित की मर्यादा के विपरीत कार्य को किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं किया जायेगा और ऐसे कार्यकर्ता की सदस्यता तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दी जाएगी और संगठन से निष्कासित कर दिया जायेगा

राष्ट्र सन्देश

वन्देमातरम्,

      भारत माँ को गुलामी की बेडि़यों से आज़ाद कराने की महाक्रांति के यज्ञ में लाखो-लाखो बलिदानी पुत्रों ने अपना सर्वस्य बलिदान कर दिया और अपनी भारत माँ को फिर से परम वैभवशाली बनाने का सपना देखा था परन्तु आज़ादी के 68 वर्ष के बाद भी देश की दशा में कोई खास परिवर्तन नही आया यहाँ तक की आज़ादी के महाक्रांति के महानायकों के बलिदानों को भुला दिया गया आज उनकी अमर गाथाओं को षड्यंत्र के तहत छुपाया जा रहा है, उनके सपनों का भारत गोरे अंग्रेजों की भौतिक आज़ादी के बाद पता नही कब काले अंग्रेजों (नेताओं) द्वारा मानसिक रूप से गुलाम बना लिया गया पता ही नही चला, न शहीदों न ही उनके परिवारों के साथ कोई न्याय हुआ न ही उन्हें सम्मान मिला, और न ही शहीदों के सपनो का वो भारत जिसमें न किसान को अन्नदाता होने का सम्मान मिला, न ही देश के गरीब मजदूरों को बराबरी का हक न उनको उचित शिक्षा न चिकित्सा और नही मूलभूत सुविधायें मिली।

आज ग्लोब्लाइजेशन और आधुनिकता की अंधी दौड़ मेें हम न सिर्फ विदेशी और विदेशी कंपनियों के षड्यंत्र के शिकार है अपितु हम अपनी संस्कृति संस्कार और धर्म से विमुख होते चले जा रहे है। राष्ट्र स्वाभिमान ट्रस्ट की स्थापना मैंने बहुत चिंतन के बाद की। वर्षो के राष्ट्रसेवा के तप के बाद मैं इस निष्कर्ष पर पहुँचा कि अगर शहीदों के सपनो का भारत बनाना है और शहीदों के सम्मान को पुनस्र्थापित करना है अपनी संस्कृति, सभ्यता और धर्म को इन गभीर षडयंत्रों से बचाना है तो देश के युवाओं को स्वयं अशफाक, बिस्मिल, भगत और सुभाष बनना ही पड़ेगा, एक तरफ मन व्यथित होता है यह देखकर कि नेताओें को जीते जी स्मारक बना दिया जाता है और पं. रामप्रसाद बिस्मिल जैसे अमर शहीदों का परिवार आज़ादी के बाद न सिर्फ गरीबी के फांके करता रहा बल्कि उनकी सगी बहन को घर बर्तन मांझ कर गुजारा करना पड़ा और मुफलिसी के कारण अपना घर भी बेचना पड़ा क्या सरकारों का उनके परिवार के प्रति कोई कर्तव्य या संवेदना नही थी सोंच कर मेरा हृदय उन तथा कथित सत्ताधीशों के प्रति धृणा से भरा जाता है।

क्या आपको नही लगता अब वक्त आ गया है कि उन अमर बलिदानियों के सपनो का भारत बनाने के लिए आज की युवा पीढ़ी को क्रान्तिकारी बनाया जाए उनके बीच फिर इंकलाब जिंदाबाद गूँजे क्योंकि मुझे लगता है कि जब तक शहीदों के सपनों का स्वदेशी, स्वावलंबी और स्वाभिमानी भारत नही बनता तब तक उनकी शहादत को न्याय और उनकी आत्मा को शान्ति नही मिलेगी। अतः मेरा यह सन्देश देश के प्रत्येक युवा के लिए है कि वो कुछ भी बनने से पहले अपने अंदर एक क्रान्तिकारी पैदा करे जो अपनी भारत माँ को उसी दिव्य त्याण पूर्ण आचरण और जज्बेसे पूजे जैसे उन लाखों क्रान्तिकारियों ने अपने रक्त और शीश चरणों में भेंट कर पूजा था। मेरी पावन पुण्य मातृभूमि भारत माँ को कोटिशः नमन ।

आपका
(अशित पाठक)

मुख्य मार्गदर्शक

पूज्य संत विजय कौशल जी महाराज

मुख्य संरक्षक

(पिता-स्व. राजीव दीक्षित जी) श्री राधेश्याम दीक्षित

(माता-स्व. राजीव दीक्षित जी) श्रीमती मिथलेश दीक्षित

पूज्य संत श्री केशवानन्द जी महाराज

पूज्य संत श्री गिरीश जी महाराज

संरक्षक

श्री सुभाष टोपे

(वंशज क्रान्तिकारी तात्या टोपे)

श्री सुजीत आजाद

(प्रपौत्र शहीद चन्द्रशेखर आजाद)

श्री देशपाल सिंह राघव

(पुत्र आजाद हिन्द फौज के नायक फूल सिंह)

राजकुमारी कुसुम मेहदिल

(वंशज वीरांगना अवंतीबाई)

श्री अशफाक उल्ला खाँ

(प्रपौत्र शहीद अशफाक उल्ला खाँ)

श्री विजय शिशैदिया

(प्रपौत्र श्री दुर्गा सिंह गहलोत (1857 के क्रान्तिकारी)

श्री क्रान्ति कुमार कटियार

(क्रान्ति0 डा0 गय प्रसाद जी के पुत्र भगत सिंह के साथी)

लेखक एवं संकलन कर्ता

योगेन्द्र सिंह तोमर

(राज्य मीडिया प्रभारी पूर्वी उ.प्र.)

संपादन

भाई अखिलेश दीक्षित

(संस्थापक सदस्य एवं कोषाध्यक्ष-राष्ट्र स्वा.ट्रस्ट)